Navratri story kahaniyan in Hindi

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पूरे भारत में जब नवरात्रि आते हैं तो एक अलग ही माहौल पैदा हो जाता है सभी लोग धूमधाम से नवरात्रि मनाने लग जाते हैं जितना धूमधाम से माता का यह त्योहार मनाया जाता है इतना शायद ही कोई दूसरा त्यौहार मनाया जाता हूं ऐसा देखकर आपके अंदर यह सवाल अवश्य उठा होगा

कि आखिरकार नवरात्रि की पूरी कहानी है क्या क्या हुआ था इस दिन क्यों मनाया जाता है आखिरकार तो आप यहां पर जो कहानी पढ़ेगे उस से पढ़ कर समझ जाओगे

फिर उस कहानी के बाद में आपको अलग से दुर्गा मां व्रत कथा या कहानियां के बारे में बताया जाएगा या आप ही समझ सकते हो कि आप नवरात्रि व्रत कथा या कहानियों के बारे में फिर उसके बाद ही जान ओगे तो चलिए फिर माता की जय बोल कर कहानी शुरू करते हैं

Navratri story kahaniyan in Hindi (मां दुर्गा की स्टोरी कहानी )

बात है यह उन दिनों की जब कैलाश पर्वत पर बैठकर पृथ्वी के सबसे बड़े ध्यानी कि जो कैलाश पर बैठकर ध्यान कर रहे थे जिन्हें इस दुनिया में हम महादेव के नाम से भी जानते हैं उस समय में उस राज्य का एक राजा हुआ करता था जिसका नाम दक्ष बताया जाता है पुराणों के मुताबिक

उस राजा कि यहां पर एक पुत्री ने जन्म लिया था उस पुत्री का असली नाम दाक्षायनी बताया जाता था राजा की पुत्री होने के कारण 1 दिन भर नगर भ्रमण पर निकली थी तो उनकी मुलाकात हमारे प्यारे भोलेनाथ जी से हो जाती है माता उनकी तरफ मोहित हो जाती है

और अपने पिताजी से उनसे विवाह करने की इच्छा जताती है हालांकि जैसे तैसे उनके पिताजी मान जाते हैं लेकिन वह इस विवाद से बिल्कुल भी खुश नहीं होते हैं वह उनका विवाह कैलाश पर्वत के वासी महादेव जी से कर देते हैं बाद में फिर राजा दक्ष अपने यहां कुछ समारोह करते हैं

उस समारोह के निमंत्रण वह पूरे राज्य में बटवा देते हैं लेकिन उसका निमंत्रण उनकी पुत्री के यहां नहीं जाता है जैसे ही माता को यह बात पता चलती है तो वह अपने पति से बात करके यानी कि महादेव जी से बात कर के विवाह में जाने की जिद करती है उनके पति उन से मना करते हैं

लेकिन वह नहीं मानती है और वह उस समारोह में पहुंच जाती है बिना बुलाए जैसे ही माता अपने पिता के समारोह में पूछती है तो वह अपने पिता से बोलती है कि आपने हमें निमंत्रण क्यों नहीं दिया ऐसा सुनने के बाद में उनके पिता उन्हें भला-बुरा बोलने लग जाते हैं

और माता अपने पति के बारे में अपशब्द नहीं सुन पाती है जिसके कारण वहां वहां हो रहे हवन में कूद जाती है और उसमें अपनी आहुति दे देती है जिसके वजह से उनके प्राण निकल जाते हैं यह बाद जैसे ही महादेव जी को पता चलती है वह काफी क्रोधित होते हैं और

फिर वह उस समारोह को ध्वस्त करने के लिए अपने वीरभद्र को भेजते हैं वीरभद्र पहुंचकर उस पूरे समारोह को ध्वस्त कर देते हैं और फिर अंत में महादेव जी आते हैं वह माता के शरीर को उठाते हैं और इस पूरी पृथ्वी पर घूमने लगते हैं नवरात्रि के पीछे की कहानी यह है

कि इस बीच में जब माता का शरीर लेकर महादेव जी धरती पर घूम रहे थे तो धीरे-धीरे उनका शरीर गलत आ गया और उस शरीर के हिस्से गिरते गए जहां पर जिस शरीर का हिस्सा गिरा वहां पर ही वह शक्ति पीठ बनकर उभरा और तभी से नवरात्रि की शुरुआत हुई यह इससे अलग अलग 9 जगह गिरे थे

Navratri vrat Katha kahaniyan in Hindi

बात हे आज से हजारों वर्षों पुरानी बात चल रही थी बृहस्पति जी और ब्रह्मा जी के बीच में उन्होंने संवाद के बीच में ब्रह्मा जी से बृहस्पति जी ने पूछा कि हे भगवान आखिरकार नवरात्रि पीछे की क्या कहानी है व्रत की इसका क्या महत्व होता है व्रत करने से और इसका क्या फल मिलता है

तो फिर ब्रह्मा जी कहानी कहना शुरू करते हैं ब्रह्मा जी बृहस्पति जी से कहते हैं कि सुनो बृहस्पति बात है आज के काफी दिनों पहले की जब मनोहर नगर में एक व्यक्ति रहता था उस व्यक्ति का नाम पता और वह एक अनाथ ब्राह्मण था इस अनाथ ब्राह्मण की एक खासियत थी

कि यह मां दुर्गा का बहुत अच्छा और सच्चा भक्त था फिर जैसे-जैसे समय बीतता गया उसके घर में एक कन्या ने जन्म लिया उस कन्या का नाम उसने सुमति रखा जैसा कि मैंने आपको बताया पीड़ित की मां दुर्गा में आस्था थी इस वजह से वह रोजीना दुर्गा मां की पूजा और हवन और यज्ञ किया करता था

इस दौरान उसकी बेटी भी वहां रहती थी और अपने पिताजी को यह करता हुआ देती थी लेकिन एक दिन ऐसा हुआ कि जब पाठक मां दुर्गा की पूजा कर रहा था उस समय उसकी बेटी वहां पर उपस्थित नहीं रही किसी कारणवश वह अपनी सहेलियों के साथ में खेलने चली गई

उसने माता की पूजा को जरूरी नहीं समझा इस बात पर उसके पिता पीठ को गुस्सा आ गया और गुस्से में उसने अपनी पुत्री से कहा कि मैं तुम्हारा दीपा किसी ऐसे व्यक्ति से करवा लूंगा जो स्वास्थ्य से सही नहीं है तो उन्होंने ऐसा व्यक्ति ढूंढा जो बहुत ही गरीब था

और कुष्ठ रोगी भी था अपने पिताजी की सुमति यह बात सुनकर थोड़ा परेशान तो हुई लेकिन आखिर वो कर भी क्या सकती थी उसने अपने पिताजी से कहा कि है पिता जी जैसी आपकी इच्छा हो आप ऐसा कीजिए जैसे मेरे भाग्य में लिखा होगा वैसा हो जाएगा

यह बात सुनकर उसके पिताजी को और गुस्सा आ गया और उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह कुष्ठ रोगी और दरिद्र के साथ में विवाह कर दिया और इसके साथ ही अपनी पुत्री को ताना देते हुए कहा देखता हूं अब तू भाग्य के भरोसे लेकर क्या करती है

पिता के यह वचन सुनने के बाद में पुत्री अपने आप को कोसने लगी लेकिन आखिरकार कर भी क्या सकती थी वह अपने पति को लेकर वन में रहने चली गई इनकी यह स्थिति देखकर वहां पर अचानक मां भगवती प्रकट हो जाती है और वहां कहने लगती है

कि मैं तुम्हारे पिछले जन्मों के कर्मों से बहुत प्रसन्न हूं जो तुमने किए थे फिर अपनी बात पूरी कर कर मां भगवती सुमति से वरदान मांगने को भी करती है

ऐसा मां अपनी बात पूरी कर देती है लेकिन वही सुमति पूछती है कि हे देवी आप हो कौन क्योंकि उसने कभी पहले माता को नहीं देखा था तो वह कैसे पहचान पाती फिर उस लड़की को जवाब देते हुए देवी मां कहती है कि मैं आदिशक्ति हूं

फिर आदिशक्ति सुमति को पिछले जन्म के अच्छे कर्मों के बारे में बताती है मां भगवती बताते हुए कहती है कि तुम पिछले जन्म में निषाद की पत्नी हुआ करती थी

और तुम बहुत ही पतिव्रता भी थी तुम्हारा पति चोरी करता था जिसके कारण तुम पकड़े गए और तुम दोनों पति-पत्नी को सिपाहियों ने पकड़कर राजा के सामने पेश किया और राजा ने तुम्हें सजा सुनाते हुए कैद खाने में डाल दिया इसके साथ ही राजा ने तुम्हें 9 दिन के लिए जेल में भोजन

पानी देने के लिए भी मना कर दिया था इस प्रकार तुम्हारा वहां पर व्रत हो गया नवरात्रि के 9 दिन में तुमने ना तो कुछ खाया और नहीं जल पिया इस तरह वह तुम्हारा व्रत हो गया उस व्रत के परिणाम स्वरुप में आज तुम्हारे सामने प्रकट हुई हूं तुम जो चाहो मुझसे मांग सकती हो

यह बात सुनने के बाद में भगवती माता के चरणों में गिरती है और उन्हें प्रणाम करती है फिर वह अपने पति के रोग को सही करने के लिए कहती है मां भगवती समिति की इच्छा पूरी कर देती है

और उसके पति को सही कर देती है फिर इसके बाद में सूती वापस से मां की भक्ति करने लगती है और इस भक्ति से खुश होकर मां भगवती पुनः प्रकट होती है और उन्हें वरदान देती है

कि तुम्हें एक पुत्र होगा वह बहुत ही बुद्धिमान और धनवान और होगा इस वरदान खुश होकर सुमति ने माता से नवरात्रि के व्रत की विधि और व्रत के फल की जानकारियां मांगी

तभी से ही नवरात्रि का व्रत किया जाता है और यही व्रत की कहानी है बाकी नवरात्रि की व्रत की विधियां आपको पता ही होगी अगर नहीं है तो आप हमसे पूछ सकते हैं कमेंट बॉक्स में कमेंट करके हम उससे संबंधित भी लेख लिख देंगे

Navratri vrat Katha kahaniyan का असली मतलब

इस लेख को यहां तक पढ़ने के बाद में आपने पूरी व्रत की कहानी जान ली है लेकिन अब आप में से कुछ ज्यादातर लोग पहले तो कुछ इच्छा बनाएंगे फिर उसके बाद में माता का व्रत करेंगे लेकिन यही आपने भूल कर दिया आपने इसलिए को ध्यान से पढ़ें

जब उस लड़की ने व्रत किया था तब उसकी कुछ भी इच्छा नहीं थी माता से उसने बिना इच्छा के व्रत किया था लेकिन हम तो इसका उल्टा ही करेंगे हम पहले माता के सामने इच्छा रखेंगे और फिर बाद में व्रत करेंगे तो आपको इच्छा बिल्कुल भी नहीं करनी है आप बिना इच्छा के व्रत करें

By Master ravi

मेरा नाम रवि सुमन है मैं किसी भी बात को लोगों को बहुत आसान भाषा में समझा पाता हूं इसलिए मैंने लिखना शुरू किया है मैं दिसंबर 2021 से ही लिख रहा हूं